(भाग 6 का बाकी)
क्रोध को समायोजित करें
आज मानवीय सभ्यता विनाश के कगार पर खड़ी है और विनाश के कारण उत्पन्न भय की आशंका में क्रोध की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका है। मनुष्य को सभी स्तर पर इस भावावेश के कारण अनेक नुकसान उठाना पड़ता है। यदि मानवीय सम्पूर्ण स्वास्थ्य को ध्यान में रखें तो अकेले इस भाव मात्र से बहुत अधिक खतरा सतत् बना रहता है। इसलिए इससे होने वाले नुकसान का ख्याल रखना अत्यन्त आवश्यक है। ताकि इसकी रोकथाम के लिए उस दिशा में समुचित प्रयास किया जा सके। सम्पूर्ण स्वास्थ्य के अन्तर्गत चारों ही प्रकार के स्वास्थ्य आ जाते हैं ––
1. शारीरिक स्वास्थ्य।
2. मानसिक स्वास्थ्य।
3. सामाजिक स्वास्थ्य।
4. आध्यात्म्कि स्वास्थ्य।
1. शारीरिक स्वास्थ्य पर क्रोध के कारण उत्पन्न प्रभाव शरीर के भिन्न-भिन्न हिस्से पर अलग-अलग दिखाई पड़ता है, जिसके लक्षण निम्नलिखित है –– (A) पसीना छूटना, (B) चेहरे का लाल टमाटर जैसा हो जाना,
(C) जुबान का लड़खड़ाना और हाथ का कांपना, (D) तनाव के कारण तत्काल माँसपेशियों की शक्ति में अप्रत्याशित वृद्धि का होना, (E) आन्तरिक जागरुकता में अत्यन्त कमी,
(F) हृदयगति में अप्रत्याशित वृद्धि जिससे (Symphathetic system overflow) का ज़्यादा होना।
2. मानसिक स्वास्थ्य पर इसका अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। क्रोध जीवन में दो तरह से अभिव्यक्त होता है (A) या तो हम क्रोध को अभिव्यक्त कर दें जिसे Anger out कहा जाता है। इससे आपका व्यक्तित्व बदनाम होता है सभी बने हुए काम भी खराब हो जाते हैं। (B) क्रोध को पी जाना या समा लेना जिसे Anger in पद कहा जाता है। आज का सभ्य समाज अपने व्यक्तित्व को तो बदनाम होने से बचा लेता है और काम भी बिगड़ने से बच जाता है। परन्तु इससे दोहरे व्यक्तित्व का निर्माण होता है। आप गुस्सा अन्दर से तो करते रहते हैं और बाहर होठों पर बनावटी मुस्कान बिखेर लेते हैं। जो व्यक्ति इस कारण गुस्से को अन्दर दबा लेता है, उसके परिणाम पहले वाले से भी खतरनाक होते हैं। इस अवस्था में दमित क्रोध या तो भयंकर विस्फोट की तरह प्रकट होता है या तो व्यक्ति चिड़चिड़ा, अवसादग्रस्त और हीनभावना का शिकार हो जाता है। मनुष्य की ऐसी अवस्था कभी अल्सर तो कभी-कभी हार्ट अटैक का कारण भी बन जाती है।
3. आज जो समाज में हिंसा है आतंक है वास्तव में इसी गुस्से का परिणाम है जो हमें समाज में एक आदर्श व्यक्ति नहीं बनने देता है।
4. हमारा आध्यात्मिक स्वास्थ्य अर्थात् ध्यान (Meditation) गुस्से की स्थिति में तो सम्भव ही नहीं है।
कैसे कम करें?
(Physical and mental relaxation) शारीरिक और मानसिक विश्रान्ति के माध्यम से क्रोध द्वारा उत्पन्न तनाव को मिटा सकते हैं। कुछ लोगों का मत है कि भोजन के बाद थोड़ा विश्राम ज़रूरी है जिसे आजकल Post lunch nap कहते हैं जो कम-से-कम 15-20 मिनट का होना चाहिए। कुछ लोग ध्यान और प्रार्थना को भी इस समय करने की सलाह देते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि क्रोध आये तो अपने दोनों हाथों को जमकर दबाईये तो कुछ लोगों का अनुभव है,
अपनी ठोडी को दबाने से भी गुस्सा कम होता है। आप चाहे तो इस तरह की विधियों का भी प्रयोग कर सकते हैं।
1. प्रतिदिन स्वस्थ विचारों का भोजन करें। राजरोग इसका सबसे अच्छा साधन है। वैज्ञानिक रूप से भी यह सिद्ध हो चुका है कि सहज राजयोग के द्वारा हार्ट, अल्सर और तनाव के रोगियों पर इसका बहुत ही अच्छा असर हुआ है।
2. सात्त्विक भोजन भी तनाव और गुस्सा कम करने में सहायक है,
हिंसा को भी कम करने में सहायक है –– यह वैज्ञानिक परीक्षण से भी सिद्ध हो चुका है। फल-फूल जो सबसे अच्छा Antioxident है सात्विक भोजन के अन्तर्गत आते है।
ज्ञान और ज्ञान-स्वरूप में भिन्नता
दो बाते हैं –– एक शैक्षणीय, दूसरा है –– साक्षात करणीय अर्थात् एक तो सत्य ज्ञान या सिद्धान्त है। लेकिन जब तब वह पुरुषार्थ द्वारा या प्रैक्टिकल अभ्यास द्वारा अनुभव में नहीं आता, स्वरूप नहीं बनता तब तक वह उधार ही रह जाता है। फलत व्यवहार में वह हमें सफलतामूर्त नहीं बनने देता।
जीवन में सफलता और समृद्ध के मार्ग में तनाव और चिन्तारूपी राक्षसी सुरसा की तरह मुख खोले निगलने को खड़ी है। तनाव और चिन्ता दोनों अन्योनाश्रित है। भय अकेले इतना तनाव पैदा करता है जितना अन्य सभी कारण मिलकर भी पैदा नहीं कर पाते हैं। भय के विचार अनेक प्रकार के हैं। (शेष भाग 8 पर)
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