उद्देश्य –– अनन्त की उड़ान (PART : 1)

0

 


उद्देश्य –– अनन्त की उड़ान

प्रभावशाली और सफल जीवन के लिए सर्वप्रथम यह आवश्यक है कि आपका उद्देश्य कितना महान् है। यदि आपका उद्देश्य साधारण है तो उसकी गुणवत्ता तथा उसकी उपलब्धि भी साधारण ही होगी। अब यह चुनाव आप पर निर्भर करता है कि आपकी जीवन दृष्टि कहाँ केन्द्रित है। साधारण उद्देश्य अर्थात् दिव्यगुणों और नैतिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित शाश्वत और अविनाशी सुखमय दिव्य जीवन। ऐसा अपरिवर्तनीय और दीर्घकालिक उपलिब्धयों वाले महान् उद्देश्य के लिए जो व्यक्ति समर्पित है, संतत्व की गरिमा सहजता से ही उसके जीवन में प्रकट होने लगती है। जो व्यक्ति अपने सामने ऊँचा उद्देश्य रखता है, वह अवश्य ही एक दिन उसे पूर्ण करने में सफल होता है। लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि वह अपने लक्ष्य पथ पर तीव्रवेग से निरन्तर बढ़ता चला जाए। इसके विपरीत जो व्यक्ति अपने सामने कोई बड़ा उद्देश्य नहीं रखता वह जीवनभर केचुँए की चाल सें रेंगता रह जाता है।

–– इमरसन

उद्देश्यहीन व्यक्ति ही जीवन में भयंकर रूप से असफल होते हैं क्योंकि उद्देश्यहीन होने पर तो वह कोई काम में रुचि लेते हैं और पूरे दिल से काम ही करते हैं। उनका मन हमेशा चंचल रहता है और इसलिए वह दृढ़ता से काम में नहीं लगे रह सकते हैं।

–– स्वेटमार्डेन

जीवन का उद्देश्य यदि सिर्फ जीवन का निर्वाह करना ही है, तो यह उद्देश्य दो कौड़ी का है। ऐसा तो पशु पक्षी भी कर रहे हैं। फिर हम में और पशु पक्षी में अंतर क्या रह जाता हैं?

–– अज्ञात

किसी भी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उस कार्य का प्रशिक्षण और उस कार्य में प्रवीणता हासिल करना अत्यन्त आवश्यक है। जब तक मानसिक रूप से व्यक्ति उस कार्य में कुशल नहीं हो जाता है तब तक, उस विषय या उस कार्य में सफलता हॉसिल नहीं हो सकती है। मनुष्य का यह परम कर्त्तव्य हो जाता है कि जीवन के उत्कर्ष के लिए अपने उद्देश्य का निर्धारण अवश्य कर ले और उसके अनुसार योजना बनाकर उस दिशा में अपने प्रयत्न प्रारम्भ कर दे। क्योंकि उद्देश्य विहीन मनुष्य के लिए उन्नति और सफलता का सवाल ही नहीं उठता है। उद्देश्य वह नक्शा है, वह दिशा सूचक यंत्र है, जो मनुष्य को जीवन के विशाल सागर में उसके गन्तव्य अर्थात् लक्ष्य तक पहुँचाने में मदद करता है। आज ऐसे बहुत से लोग हैं जो जीवन की दौड़ में लक्ष्यविहीन, अंत में अपने को खाली महसूस करते हैं। क्योंकि उन्हें यही पता नहीं है कि उन्हें क्या चाहिए। भला आप ही बताइये उन्हें क्या मिलेगा।

उद्देश्य निर्धारण में कल्पना-शक्ति का प्रभाव

इस भुवन में हम जो कुछ भी पाना चाहते हैं वह सर्वप्रथम हमारे मनोमय लोक में आकार ग्रहण करता है। इसे ही कल्पना लोक या मानसिक जगत कहा जाता है। चूंकि यह भावलोक सूक्ष्म और शक्तिशाली है इसलिए हम जो भी लक्ष्य बनाते हैं और, उसे पाने की प्रबल आकांक्षा करते हैं, तक्षण हमारा अचेतन मन प्रयत्न, आशा, उमंग-उत्साह, हिम्मत, आत्म-विश्वास इत्यादि अनेक सुषुप्त आंतरिक शक्तियों का ध्रुवीकरण प्रारम्भ कर देता है। फलत सफलता चुम्बक की तरह हमारे पास खिंची चली जाती है।

आपकी महान् कल्पनाशक्ति

मन जिस रूप की कल्पना करता है, वैसा ही हो जाता है। आज जैसा है वैसा ही उसने कल्पना की थी। प्रबलतम प्रयास से अन्यथा हो सकता है और फिर उससे भी प्रबलतम प्रयास से और भी अन्यथा हो सकता है।

–– योग वशिष्ट

हे महान् कल्पना शिल्पी, अमूर्न चिन्तन या विलक्षण कल्पना शक्ति आत्मा को परमात्मा द्वारा प्रदन एक दिव्य उपहार है। संसार की बहुमूल्य कृति या मनुष्य द्वारा श्रेष्ठतम सृजन, अमूर्त चिन्तन शक्ति का ही प्रतिफल है। विचारों, भावों, स्वप्नों और कल्पनाओं के माध्यम से ही इस अमृत कलश के दर्शन सम्भव है।

हमारे मन के विचार हमारी कल्पना के ब्राह्य रूप ग्रहण करते हैं। कहता हूँ जब तक बनेगा यह नर नारायण का प्रतिनिधि,तब तक व्यर्थ सिद्ध होगी, यह जगन्मोक्षकारी सब गतिविधि।

–– अज्ञात

(शेष भाग.... . . .2)

प्रजापिता   ब्रह्माकुमारी   ईश्वरीय   विश्व   विद्यालय   में   सपरिवार   पधारें। आपका   तहे   दिल   से   इस   ईश्वरीय     परिवार   में   स्वागत   है।

 

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
Post a Comment (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top