उद्देश्य –– अनन्त की उड़ान (PART : 6)

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(भाग 5 का बाकी)

सारे दिन और रात में प्रत्येक व्यक्ति को अवकाश के छोटे-छोटे समय के ऐसे टुकड़े अवश्य प्राप्त होते हैं जिसकी तरफ बहुधा उसका ध्यान ही नहीं जाता है। दुनिया में ऐसे बहुत से महान् लोगों ने समय के इसी छोटे-छोटे हिस्से का प्रयोग कर अपने महान् उद्देश्य को प्राप्त कर लिया। फिर आप ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं।

समय इंसान की सबसे बड़ी सम्पत्ति है। यदि कोई इसे विवेकपूर्वक खर्च करे तो वह अवश्य ही जीवन में बहुमूल्य सम्पदा को प्राप्त कर सकता है। यदि आप प्रत्येक दिन अपना एक घण्टा पढ़ने में लगाते हैं और 25-30 पृष्ठ प्रतिदिन पढ़ डालते हैं।

तो इसका मतलब हुआ कि एक साल में आप 10,950 पृष्ठ पढ़ जायेंगे। यदि नियमितता का यह क्रम 10 वर्ष भी रखा जाये तो आप 1,09,500 पृष्ठ तक पढ़ जायेंगे और आप उस विषय के महान् ज्ञानी बन जायेंगे।

निम्नलिखित लोगों ने समय के छोटे-छोटे हिस्से का नियमित प्रयोग कर, देखिए क्या से क्या अजूबा कर दिखाया।

1. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 5 महीने की अल्पावधि में ही मांडला जेल में ब्रिटिश हुकूमत के समय जब वे नज़रबन्द अवस्था थे तब उन्होंने महत्त्वपूर्ण `गीता रहस्य' की रचना कर डाली। श्रीमद्भगवद्गीता पर यह भाष्य 900 पृष्ठों का था।

2. उनकी दूसरी अनुपम कृति थी `द ओरियन' अर्थात् वेद काल का निर्णय, जिसकी रचना उन्होंने केशरी के सम्पादन के बाद के बचे हुए समय का सदुपयोग करके किया था।

3.  जेल कोठरी में बन्द जर्मन युवक जाइगोर ने `दी फोट्रेस' की सुन्दर रचना कैद के दौरान ही कर डाली। उसकी वह प्रथम प्रकाशित पुस्तक ने जर्मनी में बहुत ही प्रसिद्ध पाई। बाद में वह महान् साहित्यकार भी बना।

4.  विश्व विख्यात ग्रंथ `हिन्दू कैमिस्ट्री' के अमर रचनाकार, बंगाल केमिकल के संस्थापक पी.सी. राय प्रेसीडेन्सी कॉलेज कलकना में अध्यापन के साथ-साथ गाँधी जी के खादी क्रान्ति में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे, उस समय की बात है। उन दिनों अपने व्यस्ततम समय में से थोड़ा-थोड़ा समय निकाल कर भी उन्होंने इतनी बड़ी रचना कर डाली।

5. लांगफेलोने `इनफरलो' नामक की पुस्तक का अनुवाद मात्र प्रतिदिन नियमित रूप से उतना समय ही लगाकर कर दिया जितने समय में उनका चाय का पानी खोलने लग जाया करता था।

6. 23 भाषा के विद्वान संत विनोबा भावे अपने व्यस्ततम समय में थोड़ा समय नियमित रूप से निकालकर नई भाषा सीखने में लगाते थे। अपने अंतिम दिनों में भी वे चीनी भाषा सीख रहे थे।

7.  ब्रिटिश सेना में चिकित्सक पद पर कार्यरत `हेनरी व्हाइट' ने अपने छोटे से समय का नियमित प्रयोग कर फ्रेंच, इटेलियन, ग्रीक इत्यादि कई भाषाएं सीख लीं। जानते हैं, वह छोटा-सा समय क्या था। उनका घर से कार्यालय तक पैदल आने-जाने का बस।

राजनीति और संसद सदन में इतना अधिक व्यस्त रहने के बाद भी आज आप अपने साठवें ग्रंथ का प्रकाशन करने जा रहे हैं, महाशय यह कैसे संम्भव हो रहा है? यह प्रश्न कर रहे थे `एडवर्ड बटलर महाशय से उनके एक मित्र' जानते हैं क्या जवाब दिया उन्होंने अपने मित्र को लेखक बटलर महाशय ने मात्र प्रतिदिन वे तीन घण्टा इस कार्य में लगाते हैं।

(एडवर्ड बटलर -- इग्लैण्ड में सांसद थे)

इस तरह महापुरुषों ने अपने समय का नियमित प्रयोग कर ऐसे अनेक आश्चर्यजनक कार्यों का सम्पादन कर अपना जीवन सफल किया। यदि हम अपने समय का एक टाइम-टेबल बनाकर उन छोटे-छोटे अवकाशों को नियमित रूप से क्रमबद्ध तरीके से कार्य में लगाएँ तो सफलता निश्चित ही मिलेगी। रुपये-पैसे के साथ-साथ समय की मिनक्रिययिता पर ध्यान देने से प्रभुप्रदत श्वॉस की इस अमूल्य सम्पदा के महत्त्व को समझकर विवेक पूर्ण तरीके से खर्च करने से एक दिन हम भी अपने महान् उद्देश्य को पाने में सफल हो जायेंगे।

उमंग और उत्साह उद्देश्य की बुनियाद है

आज के इस प्रतियोगिता वादी संस्कृति में, नाम, मान-शान की अभिलाषा ही शक्तियों का भंडार है। यही मनुष्य को कठिन परिस्थिति में भी बाधाओं को झेलकर आगे बढ़ाने में प्रोत्साहित करती रहती है। उमंग और उत्साह का दूसरा नाम ही महत्त्वाकांक्षा है। बड़ी से बड़ी सफलता में इसका ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। अचेतन मन की विशाल शक्तियों को जगाकर कार्य में लगाने का महत्त्वपूर्ण कार्य उमंग और उत्साह के बिना सम्भव ही नहीं है।

सफलता के लिए मात्र उद्देश्य ही पर्याप्त नहीं है, परन्तु उसके लिए हृदय में अटूट श्रद्धा और इरादे का बुलन्द होना भी परम आवश्यक है। उमंग-उत्साह और कार्य के लिए प्रयत्न ही सफलता का ऊर्जा श्रोत है। यह वह अग्नि है जो प्रतिपल प्रयत्न को उत्तेजित करती रहती है। नहीं तो उत्साह की आग के बिना व्यक्ति का प्रयत्न हतोत्साहित होकर मंद पड़ जायेगा। उत्साह वह आन्तरिक प्रेरणा स्त्रोत है जो प्रतिपल व्यक्ति को कठिनाईयों से जूझने में मदद करता रहता है।

(शेष भाग 7 पर)

 

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